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Thursday, January 30, 2020

पुरुषों में 40 साल की उम्र के बाद क्या बदलाव होते हैं? What changes to a men’s body after 40 year of age,


पुरुषों में 40 साल की उम्र के बाद क्या बदलाव होते हैं?
What changes to a men’s body after 40 year of age,
40 की उम्र के बाद पुरूषों के शरीर में भी कई तरह के परिवर्तन होते हैं। इस दौरान शरीर कुछ इस तरह से बदलने लगता है, जिसकी आपको उम्मीद भी नहीं होती। यहां हम आपको उन सभी चीजों के बारे में बताएंगे, जिनसे आपका शरीर 40 साल के बाद बदलना शुरू हो जाता है। देखा जाए, तो उम्र बढ़ने का सबसे ज्यादा असर आपकी त्वचा, सेहत और क्षमता पर पड़ता है। शरीर की सेहत से जुड़ी जरूरतों में बदलाव आता है और इस उम्र को पार करने के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी घेर लेती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 40 वर्ष की उम्र के बाद शरीर का डी जनरेशन शुरू हो जाता है। इसलिए इस उम्र में चेहरे की रौनक को बरकरार रखने और स्वस्थ रहने के लिए अपनी लाइफस्टाइल में छोटे-मोटे बदलाव करना बहुत जरूरी है।
                  इसके अलावा हेल्दी डाइट की मदद से भी खुद को 40 वर्ष की उम्र में हेल्दी और यंग रखा जा सकता है। तो चलिए, आज हम आपको इस आर्टिकल में 40 के बाद पुरूषों के शरीर में होने वाले बदलावों के बारे में तो बताएंगे ही, साथ ही यह भी बताएगें कि 40 के बाद पुरुष के शरीर में परिवर्तन से कैसे निपटा जा सकता है। लेकिन इससे पहले जानिए पुरूषों के लिए 40 की उम्र क्यों महत्वपूर्ण होती है।
पुरूषों के लिए 40 की उम्र का महत्त्व,
What happens to a men’s body at 40 year of age
मर्दों के लिए 40 की उम्र बहुत महत्व रखती है। एक तरह से इस उम्र में उनका नया जीवन शुरू होता है। इस उम्र में पुरूष मिड लाइफ क्राइसेस यानि मध्य जीवन के संकट के लक्षणों को झेलते हैं, जिसमें डबल चिन की चिंता, बाल पतले होना और खराब दांत, हड्डियाँ कमजोर होना, टेस्टोस्टेरोन लेवल कम होना, कामेच्छा में कमी जैसी समस्याएं शामिल हैं। इस उम्र में पुरूष की कमाई चरम पर होती है और कम से कम उसे एक स्वास्थ्य समस्या (जैसे उच्च रक्तचाप या बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल) रहती ही है।

विशेषज्ञ कहते हैं, कि महिलाओं की तरह पुरूषों को भी इस उम्र में अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना चाहिए। पुरूषों को ध्यान रखना चाहिए, कि 40 के बाद मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है और शरीर उनके द्वारा की जाने वाली किसी भी चीज से बहुत प्रभावित होता है, इसलिए 40 की उम्र में पुरूषों को कार्डियो फिटनेस के साथ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज भी करनी चाहिए।
पुरुषों में 40 साल की उम्र के बाद क्या बदलाव होते हैं?
How men body change After 40 year of age
40-65 वर्ष की उम्र में महिलाओं की ही तरह पुरूषों के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जो उनके जीवन में नए दृष्टिकोण और नए रास्तों का अवसर प्रदान करते हैं। नीचे जानते हैं, 40 वर्ष की आयु में पुरूषों के शरीर में आने वाले परिवर्तनों के बारे में।
मोटापा बढ़ सकता है:- 40 की उम्र के बाद आपकी कमर बढ़ सकती है। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे शरीर में कैलोरी की मात्रा कम होने लगती है, जिस वजह से पेट का मोटापे में वृद्धि होती है। इसलिए इस उम्र में अपनी एक्टिविटीज पर ध्यान दें और हिसाब से खाना खाएं।
दिल संबंधी समस्याएं:- 40 के दौरान आपके दिल के काम करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। इस उम्र में ब्लड की पंपिंग कम हो जाती है, जिस कारण धमनियों में कोलेस्ट्रॉल एकत्रित हो जाता है और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होने लगती है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए हमेशा स्वास्थवर्धक भोजन करने की सलाह दी जाती है।
मसल्स हो जाते है कमजोर:- 40 की उम्र की पार होते ही पुरूषों की बॉडी की मसल्स बनाने की क्षमता बहुत कम हो जाती है, जिसे लाम कहते हैं। इसके कारण शरीर मसल्स को अधिक ऑक्सीजन नहीं दे पाता, जिससे मसल्स जल्दी रिपेयर नहीं होते।
सेक्सुअल परफॉर्मेंस में आती है कमी:- जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, सेक्सुअल परफॉर्मेंस में कमी आने लगती है। 40 के बाद पुरूषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का प्रोडक्शन कम होने लगता है और आपकी इन चीजों के प्रति दिलचस्पी कम होने लगती है।
शरीर का लचीलापन होगा कम:- 40 के बाद पुरूषों की बॉडी में फ्लेक्सेबिलिटी में कमी आना स्वभाविक है। समय के साथ आपके हाथ व पैरों में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है, जिससे शरीर में लचीलापन खत्म हो जाता है। इस समस्या से बचने के लिए बहुत ज्यादा देर तक एक ही जगह पर न बैठे रहें और हर दिन स्ट्रेचिंग और योग जरूर करें।
प्रोस्टेट कैंसर का खतरा:- 40 के होने के बाद कई पुरूषों में प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण दिखाई देना शुरू हो जाते हैं। जैसे पेशाब में जलन, रात में ज्यादा पेशाब आना आदि। इस बीमारी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सही समय पर लक्षणों का पता चलने पर तुरंत इलाज कराना चाहिए।
याददाश्त होती है कम:- ममोरी की शार्पनेस 40 साल की उम्र के बाद कम हो सकती है। इस दौरान चीजों और बातों को याद रखना बहुत मुश्किल हो जाता है। 2012 में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि 40 की उम्र के बाद पुरूषों की याददश्त कम होने लगती है।
बालों का झड़ना:- कई शोध बताते हैं, कि 40 के बाद आपके बाल पतले होने लगेंगे। लेकिन यहां, ये ध्यान रखना महत्वपूर्ण है, कि यह अनुवांशिकी पर निर्भर करता है। वैसे तो उम्र बढ़ने पर बालों का झड़ना आम समस्या है, लेकिन आप बालों के विकास को बढ़ावा देने के लिए विविस्कल और बायोटीन सप्लीमेंट्स का सेवन कर सकते हैं।
सुनने की क्षमता में आती है कमी:- 40 के दशक की शुरूआत होते ही लोगों के सुनने की क्षमता कम हो जाती है। यदि आप शुरू से ही संगीत समारोह, गायन से जुड़े हुए हैं, तो ये आपके कानों पर बहुत तनाव डालता है, जिसका असर 40 के बाद देखने को मिलता है।
प्रजनन क्षमता में कमी:- महिला हो या पुरूष दोनों में 40 के बाद प्रजनन क्षमता कम हो जाती है। पुरूषों में शुक्राणु की गुणवत्ता उम्र के साथ कम हो जाती है। यदि पुरूष 45 वर्ष से अधिक उम्र का है, तो ऐसे में उस पुरुष से गर्भवती हुयी महिला को गर्भपात की संभावना ज्यादा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, 40 वर्ष की आयु तक प्रजनन क्षमता मात्र 5 प्रतिशत ही रह जाती है।
बढ़ती उम्र से संबधित किसी समस्या के निदान के लिए संपर्क करे, दिव्यकिरण फिजियोथेरेपी एंड रिहैब डिपार्टमेंट के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल महाराजगंज,

Wednesday, January 29, 2020

कोरोना वायरस क्या है , कैसे फैलता है ? लक्षण और बचने के उपाय,

कोरोना वायरस क्या है , कैसे फैलता है ? लक्षण और बचने के उपाय,
What is coronavirus Symptoms and Prevention
Coronavirus  कोरोना वायरस चीन में लोगों के मौत का कारण बन रहा है। इसकी शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई थी जो अब फ्रांस, अमेरिका, जापान, थाईलैंड और इंग्लैंड सहित दुनिया के कई देशों में फैल चुका है। कोरोना वायरस इंफेक्शन बहुत घातक है और इसका प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। चीन में फैला कोरोनावायरस बिल्कुल नया है और माना जा रहा है कि यह सार्स नामक कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है। ऐसे में कोरोनावायरस बीमारी के लक्षण, इलाज और बचाव के बारे में हम आपको दे रहे हैं पूरी जानकारी।
सार्स severe acute respiratory syndrome (SARS) नामक कोरोना वायरस के कारण वर्ष 2002-03 में 8,098 लोग संक्रमित हुए थे और उनमें से 774 लोगों की मौत हो गई थी। नया कोरोना वायरस दिसंबर 2019 के पहले हफ्ते में पकड़ में आया था। प्रयोगशाला में जांच के बाद इसे नए प्रकार का कोरोना वायरस घोषित किया गया। वास्तव में छह प्रकार के कोरोना वायरस की पुष्टि पहले ही हो चुकी है। चीन के वुहान में फैले नए कोरोनावायरस को सातवां कोरोना वायरस माना जा रहा है। इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं कोरोना वायरस क्या है, कैसे फैलता है कोरोना वायरस, कोरोना वायरस के लक्षण क्या हैं और कोरोनावायरस से बचने के उपाय क्या हैं।
कोरोना वायरस के मुख्य तथ्य
·       अधिकांश कोरोनावायरस खतरनाक नहीं होते हैं। हालांकि उनमें से कुछ प्रकार गंभीर हैं।
·       अधिकांश कोरोनावायरस उसी तरह फैलते हैं जैसे अन्य सर्दी पैदा करने वाले वायरस फैलते हैं
·       कोरोनावायरस जानवरों और मनुष्यों दोनों को संक्रमित कर सकता है।
·       यह मनुष्य से मनुष्य में फ़ैल सकता है।
·       कोरोनोवायरस संक्रमण होने की सबसे अधिक संभावना छोटे बच्चों में होती है।
·       अक्सर कोरोनावायरस के लक्षण साँस लेने में परेशानी, नाक बहना, खांसी और गले में खराश और कभी-कभी बुखार भी शामिल है।
·       कोरोनावायरस बच्चों में मध्य कान के संक्रमण का कारण भी बन सकता है।
·       यदि कोरोनोवायरस संक्रमण आपके फेफड़ों में फैलता है, तो इससे निमोनिया हो सकता है, विशेष रूप से वृद्ध लोगों में, हृदय रोग वाले लोग, या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग।
·       अभी कोरोनावायरस के लिए कोई टीका नहीं है ।
·       इनके इन्फेक्शन से बचने के लिए साफ-सफाई के सही तरीके अपनाने चाहिए।

क्या है कोरोना वायरस? – What is coronavirus
कोरोना वायरस कई वायरसों का एक ग्रुप है जो जानवरों से इंसानों में फैलता है। कोरोनावायरस का यह नाम उसके क्राउन जैसे शेप के कारण पड़ा। यह वायरस जानवरों और इंसानों दोनों को संक्रमित करता है। कोरोना वायरस भी वैसे ही फैलता है जैसे कोल्ड के वायरस फैलते हैं। चीन के वुहान में फैला कोरोनावायरस नए प्रकार का है जिसे अभी 2019 नोवल कोरोनावायरस (2019-nCoV) नाम दिया गया है। यह वायरस शरीर के कई सिस्टम को प्रभावित करता है जिससे पीड़ित व्यक्ति में कफ, छींक आना, भारीपन जैसे संकेत दिखते हैं।
कोरोना वायरस कैसे फैलता है?- How are coronavirus transmitted?
मर्स और सार्स वायरस की तरह नया कोरोना वायरस भी जानवरों से ही आया है। माना जा रहा है कि चीन के वुहान में मिलने वाले सी फूड के कारण कोरोनावायरस का संक्रमण फैला है। यह वायरस अन्य जीवित जानवरों जैसे चमगादड़,सूअर, घरेलू जानवर, चिड़िया, कुत्ता, बिल्ली, ऊंट और मर्मोट्स (marmots) के कारण फैलता है। इस वायरस का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह इंसानों से इंसानों में फैलता है
                अन्य कोरोनावायरस की तरह नया कोरोना वायरस भी कॉमन कोल्ड के दौरान कफ या छींक आने पर ड्रॉपलेट्स के द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पहुंच सकता है। इसके अलावा किसी दूषित सरफेस जैसे दरवाजे के हैंडल, सीढ़ी या बालकनी की रेलिंग को छूने से भी फैल सकता है। कोरोना वायरस से संक्रमित एक व्यक्ति कई लोगों को संक्रमित कर सकता है। हालांकि यह नए प्रकार का कोरोना वायरस है इसलिए इसके फैलने का सटीक कारण पता नहीं चल पाया है।
कोरोना वायरस इंफेक्शन के लक्षण – Coronavirus symptoms
चीन में फैले कोरोनावायरस के लक्षण अन्य श्वसन संक्रमण (respiratory infection) की तरह ही होते हैं। इसलिए कई बार यह पता लगाना मुश्किल होता है कि व्यक्ति कोरोना वायरस के संक्रमण से ग्रसित है या राइनोवायरस के इंफेक्शन से। इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होती है। गले में दर्द, जुकाम, खांसी, बुखार आना इसके शुरुआती लक्षण माने जाते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण के मुख्य लक्षण ये हैं:
·       सिरदर्द: पूरे दिन सिर भारी रहना, सिर में तेज दर्द महसूस होना।
·       नाक बहना: लगातार कई दिनों तक नाक बहना और दवा लेने के बाद भी नियंत्रित न होना।
·       खांसी: तेज खांसी आना कोरोनावायरस के संक्रमण का संकेत हो सकता है।
·       गले में खराश: इस संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के गले में हमेशा खराश बनी रहती है।
·       बुखार: कोरोना वायरस का संक्रमण होने पर बुखार आना इस इंफेक्शन का शुरुआती लक्षण है।
·       अस्वस्थ महसूस करना: कोरोना वायरस का संक्रमण होने पर शरीर के अंदर बेचैनी सी होती है और व्यक्ति को सही तरीके से समझ में नहीं आता है कि उसे हुआ क्या है लेकिन वह काफी अस्वस्थ और बीमार महसूस करता है।
·       छींक आना : कोरोना वायरस श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है जिसके कारण छींक आना इस समस्या का संकेत है।
·       अस्थमा का बिगड़ना : अस्थमा के रोगियों को इस संक्रमण के कारण सांस लेने में सबसे ज्यादा कठिनाई होती है।
·       थकान महसूस करना: पूरे दिन थकान महसूस होना और शरीर में लगातार थकान बनी रहना कोरोना वायरस इंफेक्शन का लक्षण है।
·       निमोनिया: कोरोनावायरस का इंफेक्शन श्वसन तंत्र के निचले हिस्से में फैलता है जिसके कारण खासतौर से वृद्ध लोगों में निमोनिया की समस्या हो जाती है। साथ ही हृदय रोगों और कमजोरी इम्यून सिस्टम वाले लोगों में भी कोरोना वायरस के कारण निमोनिया के लक्षण नजर आते हैं।
·       फेफड़ों में सूजन: वायरस के कारण फेफड़ों में सूजन आ जाती है जिससे इसकी गंभीरता बढ़ सकती है।
कोरोना वायरस इंफेक्शन का इलाज – Treatments for coronavirus
अभी तक कोरोनावायरस का कोई इलाज नहीं है। लेकिन सावधानियां बरतकर इस वायरस के इंफेक्शन की चपेट में आने से काफी हद तक बचा जा सकता है। जिस तरह से कॉमन कोल्ड का कोई इलाज नहीं है, ठीक उसी तरह कोरोनावायरस के इंफेक्शन का भी कोई विशेष इलाज नहीं है। कोरोना वायरस के इंफेक्शन से बचने के लिए अभी तक कोई एंटीवायरल दवा या वैक्सीन विकसित नहीं की गयी है। इसलिए सावधानी ही बेहतर उपाय है। कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों को कुछ थेरेपी भी दी जा रही है हालांकि यह बहुत प्रभावकारी नहीं है।
कोरोनावायरस का निदान – Diagnosis of coronavirus
सबसे पहले कोरोनावायरस के संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है और श्वसन तंत्र की जांच करके सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों में कमजोरी सहित अन्य प्रभावों का पता किया जाता है। जांच के दौरान कोरोना वायरस की पुष्टि में कठिनायी होने पर मरीज के खून का सैंपल लैब में भेजा जाता है और ब्लड टेस्ट से कोरोनावायरस के संक्रमण का निदान किया जाता है।

भारत को कोरोना वायरस से कितना खतरा
चीन में भारत के 1500 से अधिक छात्र पढ़ाई करते हैं। पिछले दिनों चीन से भारत लौटे राजस्थान के एक छात्र में कोरोना वायरस का इंफेक्शन पाया गया जिसे जयपुर के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

कितना खतरनाक है कोरोना वायरस
कई देशों में कोरोनावायरस का इंफेक्शन तेजी से फैल रहा है और इसकी चपेट में आने वाले लोगों की मौत हो रही है। चूंकि इस वायरस की कोई दवा या वैक्सीन नहीं है इसलिए इसे बेहद खतरनाक माना जा रहा है। चीन में अब तक कोरोनावायरस से 80 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 2744 लोग संक्रमित हैं। इसके साध ही 5794 लोगों के संक्रमित होने की आशंका है। हालांकि इसमें सर्दी जुकाम जैसे लक्षण ही दिखते हैं लेकिन इसका असर इतना गंभीर होता है कि व्यक्ति की मौत हो सकती है।
कोरोनावायरस से कैसे बचें – Coronavirus prevention
कोरोनावायरस के इंफेक्शन से बचने की कोई वैक्सीन निर्मित नहीं की गयी है इसलिए बचाव ही कोरोना वायरस के संक्रमण का इलाज है। कोरोनावायरस के इंफेक्शन से बचने के लिए ये उपाय करें:
·       अपने हाथों को दिन में कई बार साबुन, गुनगुने पानी और एल्कोहल युक्त हैंड सैनिटाइजर से साफ करें।
·       अच्छी गुणवत्ता का मास्क पहनें और घर से बाहर निकलने से पहले मास्क लगाना न भूलें।
·       अपने हाथ या उंगलियों से आंख, नाक और मुंह को न छुएं।
·       जानवरों के संपर्क से दूर रहें और पोल्ट्री मीट न खाएं।
·       बाजार का सामान खाने से परहेज करें।
·       संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें और जरुरत न हो तो घर से बाहर न निकलें।
·       खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक पर रुमाल या टिश्यू पेपर रखें।
·       जिन्हें सर्दी खांसी हो या छींक आ रही हो, उनके करीब न बैठें।
·       सड़कों या खेतों में जानवरों के संपर्क में आने से बचें।
कोरोना वायरस के असर को कम करने के लिए क्या करें – How to reduce Coronavirus infection
आमतौर पर कोरोनावायरस के इंफेक्शन को कम करने के लिए वही उपाय किये जा रहे हैं जो कॉमन कोल्ड और निमोनिया के संकेतों को कम करने के लिए किये जाते हैं। जैसे:
·       पर्याप्त आराम करें
·       पर्याप्त मात्रा में फ्लुइड लें।
·       गले में खराश और बुखार के लिए ओवर द काउंटर मेडिसिन का सेवन करें। लेकिन अगर बच्चा 19 साल से कम उम्र का है तो उसे एस्पिरिन ना दें। इसकी बजाय इबुप्रोफेन या एसिटामिनोफेन लें।
·       किसी भी तरह की दवा अपनी मर्जी से ना लें। डॉक्टर से जरुर परामर्श प्राप्त करें।
अब तो आप जान गए होगें कि कोरोना वायरस क्या है, कोरोनावायरस कैसे फैलता है, कोरोनावायरस के लक्षण क्या होते हैं और इससे बचने के उपाय क्या हैं।

यदि आप इनमे से कोई भी लक्षण देखें तो डरें नहीं और तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ हो सकता है आपके लक्षण किसी नॉर्मन बीमारी या सर्दी जुकाम के कारण हो रहें हों। अधिकांश कोरोनावायरस खतरनाक नहीं होते हैं। हालांकि उनमें से कुछ प्रकार गंभीर हैं। अधिकांश कोरोनावायरस उसी तरह फैलते हैं जैसे अन्य सर्दी पैदा करने वाले वायरस फैलते हैं कोरोनावायरस जानवरों और मनुष्यों दोनों को संक्रमित कर सकता है। इसलिए इनके इन्फेक्शन से बचने के लिए सही तरीके अपनाने चाहिए।
  अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे, के.एम्.सी. डिजिटल हॉस्पिटल महाराजगंज

KMC DIGITAL HOSPITAL नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू)


KMC DIGITAL HOSPITAL
नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू)
Neonatal Intensive Care Unit (NICU)
                  एक बच्चे का जन्म होना एक अद्भुत लेकिन बहुत ही जटिल प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया में माँ और बच्चे दोनों में कई प्रकार के शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तन होते हैं। एक बच्चे को अपनी माँ के शरीर को छोड़ कर बाहर के जीवन के लिए कई शारीरिक समायोजन (Adjustment) करने पड़ते है। एक बच्चे के लिए माँ का गर्भाशय छोड़ने का मतलब होता है की अब उस बच्चे को सारे महत्वपूर्ण शारीरिक कार्यों खुद ही करने होंगे क्योकि इसके लिए अब वो माँ के परिसंचरण (Circulation) और नाल (Placenta) पर निर्भर नहीं रह सकता है।
                   बच्चे को जन्म से पहले सांस लेने के लिए, खाना खाने के लिए, पेट की गंदगी को ख़त्म करने के लिए और इम्युनोलॉजिक प्रोटेक्शन (Immunologic Protection), इन सभी चीजो के लिए माँ पर ही निर्भर रहना पड़ता है। फिर जब बच्चा दुनिया में प्रवेश करता है, तो उसके शरीर के कई सिस्टम भ्रूण के जीवन के दौरान जिस तरह से कार्य करते थे, उससे अलग रूप में बदल देते है, जैसे-
  • फेफड़ों को बाहरी हवा से सांस लेनी पड़ती है।
  • हृदय (Cardiac) और पल्मोनरी सर्कुलेशन (Pulmonary circulation) में परिवर्तन होता है।
  • पाचन तंत्र को भोजन की प्रक्रिया खुद शुरू करनी पड़ती है और खुद ही गंदगी को बाहर निकालना पड़ता है।
  • गुर्दे (Kidney) को स्वयं ही शरीर में तरल पदार्थ और रसायनों को संतुलित करना पड़ता है और गंदगी को बाहर निकालने का काम करना पड़ता है।
  • यकृत (liver) और इम्यूनोलॉजिकल सिस्टम (Immunological system) को स्वयं ही स्वतंत्र रूप से काम करना पड़ता है।
समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के लिए यह सभी कार्य बहुत ही चुनौती भरे हो सकते है इसलिए ऐसे प्रीमैच्योर बच्चों के लिए नवजात गहन चिकित्सा इकाई (Neonatal Intensive Care Unit (NICU) के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल महराजगंज में सम्पूर्ण सुविधाओ के साथ उपलब्द है। आइये जानतें हैं इसके बारे में:-
नवजात गहन देखभाल इकाई क्या है – What is the neonatal intensive care unit?  नवजात शिशुओं को जिन्हें गहन चिकित्सा और देखभाल की आवश्यकता होती है, उन्हें अस्पताल के एक विशेष स्थान पर भर्ती किया जाता है जिसे नवजात गहन देखभाल इकाई (Neonatal Intensive Care) (NICU) कहा जाता है। के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल के एनआईसीयू में प्रशिक्षित डाक्टर उपलब्द है जो नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल करते हैं। NICU में उन शिशुओं के लिए भी मध्यवर्ती (Intermediate) या निरंतर देखभाल वाले क्षेत्र होते हैं जो बीमार नहीं होते है, लेकिन उन्हें विशेष नर्सिंग देखभाल की आवश्यकता होती है। कुछ अस्पतालों में एनआईसीयू नहीं होते हैं तो वह लोग शिशुओं को दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित कर देते है।
किन शिशुओं को एनआईसीयू की आवश्यकता होती है – Which babies need special NICU care?
एनआईसीयू में भर्ती होने वाले अधिकांश बच्चे प्रीमैच्योर (गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले जन्म लेने वाले) होते हैं, या तो वह बच्चे जिनका जन्म के समय वजन कम (5.5 पाउंड से कम) होता है, या ऐसी चिकित्सा स्थिति वाले बच्चे होते है जिनको विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। भारत में, लगभग 3.5 लाख बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं, और इनमें से कई शिशुओं का जन्म से ही कम वजन होता है। जुड़वाँ, ट्रिपल, और उससे ज्यादा संख्या वाले बच्चो को अक्सर एनआईसीयू में भर्ती कराया जाता है, क्योंकि वे समय से पहले जन्म लेते हैं और दूसरे छोटे बच्चों की तुलना में अधिक छोटे और कमजोर होते हैं। जिन शिशुओं को दिल की बीमारी, संक्रमण, या कोई अन्य जन्म दोष जैसी चिकित्सा स्थितियां होती है ऐसे शिशुओं की देखभाल भी एनआईसीयू में की जाती है।
कुछ कारकों की वजह से बच्चे को उच्च जोखिम का खतरा हो सकता हैं और एनआईसीयू में भर्ती करने की संभावना बढ़ सकती हैं। उच्च जोखिम वाले कारकों में शामिल हैं-
एनआईसीयू में बच्चे को रखने के मातृ कारक – NICU Care Maternal factors
  • माँ की उम्र 16 से कम या 40 वर्ष से अधिक हो,
  • दवा या अल्कोहल एक्सपोज़र हो,
  • मधुमेह की बीमारी,( Diabetes)
  • उच्च रक्तचाप (High blood pressure)
  • ब्लीडिंग हो रही हो,
  • कोई यौन संचारित रोग हो,
  • एकाधिक गर्भावस्था (जुड़वां, तीन या अधिक) बच्चे हो,
  • बहुत कम या बहुत अधिक एमनियोटिक द्रव निकलना,
  • झिल्ली (Membrane)  का समय से पहले टूटना (जिसे एमनियोटिक थैली या पानी का थैला भी कहा जाता है)
एनआईसीयू में बच्चे को रखने के, डिलीवरी कारक,  NICU Care, Delivery factors,
·      भ्रूण संकट (Fetal distress)/ जन्म संबंधी श्वासनली (birth asphyxia) (ऑक्सीजन की कमी के कारण अंग प्रणालियों में परिवर्तन होना)
·      ब्रीच डिलीवरी प्रस्तुति या अन्य असामान्य प्रस्तुति (Breech delivery presentation (Buttocks delivered first) or other abnormal presentation)
·      मेकोनियम (Me conium) (बच्चे का पहला मल गर्भावस्था के दौरान एमनियोटिक द्रव में चला जाना)
·      Nuchal कॉर्ड (बच्चे की गर्दन के चारों तरफ की हड्डी)
·      संदंश या सिजेरियन डिलीवरी होना (Forceps or cesarean delivery)
एनआईसीयू में बच्चे को रखने के कारण – Nicu Care Baby factors,
·       गर्भकालीन उम्र (Gestational age) में जन्म होना (जैसे 37 सप्ताह से कम या 42 सप्ताह से अधिक का समय),
·       जन्म का वजन 2,500 ग्राम से कम होना या 4,000 ग्राम से अधिक होना,
·       जन्म दोष होने से,
·       तेजी से सांस लेने, साँस लेने में तकलीफ या एपनिया (सांस रुकना) सहित कोई श्वसन संकट होने पर,
·       किसी प्रकार का संक्रमण जैसे दाद (Herpes), समूह बी स्ट्रेप्टोकोकस (Group B streptococcus), क्लैमाइडिया (Chlamydia),
·       हाइपोग्लाइसीमिया (निम्न रक्त शर्करा) (Hypoglycemia (low blood sugar),
·       अतिरिक्त ऑक्सीजन या निगरानी, या दवाओं की आवश्यकता होना,
·       रक्त आधान (blood transfusion) जैसे विशेष उपचार या प्रक्रियाओं की आवश्यकता होना,
एनआईसीयू में आपके बच्चे की देखभाल कौन करता है – Who will care for your baby in the NICU?
कुछ विशेष रूप से प्रशिक्षित स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर (Trained Health Care Professionals) होते हैं जो आपके बच्चे की देखभाल करते है, जिनमे शामिल है-
  • नियोनेटोलॉजिस्ट (Neonatologist)
  • श्वसन चिकित्सक (Respiratory therapists)
  • डाइटिशियन (Dietitians)
  • स्तनपान सलाहकार (Lactation consultants)
एनआईसीयू टीम के सदस्य उच्च जोखिम वाले नवजात शिशुओं की देखभाल करने के लिए पूरी योजना बनाकर शिशुओं के माता-पिता के साथ मिलकर काम करते हैं।
एनआईसीयू में पालन-पोषण और सावधानियां – Parenting and precaution in the Neonatal Intensive Care Unit (NICU)
समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चे (Premature baby) को एनआईसीयू में पालन-पोषण देते समय माता पिता को कुछ सावधानियां बरतने की जरुरत होती है जिसमे शामिल है-
  • प्रीमैच्योर बच्चे इन्फेक्शन के प्रति बहुत ही संवेदनशील होते है इसलिए कभी भी एनआईसीयू में उनके पास जाते समय हाथों को अच्छी तरह धोएं।
  • एनआईसीयू में बच्चे के पास जाने पर मास्क का उपयोग करें।
  • बाहरी लोगों को एनआईसीयू में प्रीमैच्योर बच्चे के पास ना जाने दें इससे इन्फेक्शन होने का खतरा हो सकता है।
  • प्रीमैच्योर बच्चे के भाई बहन जिनको सर्दी जुखाम या कोई अन्य बीमारी हो उन्हें बच्चे के पास ना जाने दें इससे बच्चे को संक्रमण का खतरा हो सकता है।
  • इन सभी सावधानियों से आप अपने बच्चे को किसी भी प्रकार के संक्रमण और जोखिम से बचा सकते है।
नवजात शिशु से सम्बंधित किसी जानकारी के लिए संपर्क करे, शिशु रोग विभाग, के.एम.सी डिजिटल हॉस्पिटल महाराजगंज,
        मोबाईल 24X7 :- 7754901213, 7754901214