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Saturday, February 29, 2020

निःशुल्क फ़िज़ीओथेरेपी सेवा, प्रत्येक सोमवार

         



निःशुल्क फ़िज़ीओथेरेपी सेवा, प्रत्येक सोमवार,  के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल  महराजगंज,
 (समय : प्रातः 9 बजे से शाम 5 बजे तक)

इन तकलीफों में कारगर है फ़िज़ीओथेरपी:-

लाइफस्टाइल संबंधी परेशानी (मोटापा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज),
क्लाइमेट चेंज से जुड़ी तकलीफें (लंबे समय तक दफ्तर के एसी में रहना, धूप के बिना रहना, लंबी सिटिंग आदि, ऐसा वातावरण जो परेशानी को बढ़ाता है),
मैकेनिकल एवं ऑर्थोपेडिक डिसऑर्डर (पीठ, कमर, गर्दन, कंधे, घुटने का दर्द या दुर्घटना के कारण भी), आहार-विहार (जोड़ों का दर्द, हार्मोनल बदलाव), खेलकूद की चोटें, ऑपरेशन से जुड़ी समस्याएं,
न्यूरोलॉजिकल बीमारियां (मांसपेशियों का खिंचाव व उनकी कमजोरी, नसों का दर्द व उनकी ताकत कम होना), चक्कर आना, कंपन, झनझनाहट, सुन्नपन और लकवा,
बढ़ती उम्र संबंधी बीमारियों के कारण चलने-फिरने में दिक्कत, बैलेंस बिगडऩा, टेंशन, हैडेक और अनिद्रा में फिजियोथैरेपी को अपना सकते है, फ़िज़ीओथेरपी सेवा के लिए सम्पर्क करे,
दिव्यकिरण फ़िज़ीओथेरेपी एंड रीहैब डिपार्टमेंट  के.एम.सी डिजिटल हॉस्पिटल महराजगंज

Friday, February 28, 2020

महराजगंज मे पहली बार, के. एम. सी डिजिटल हॉस्पिटल मे लगभग 8 Kg ओवैरियन सिष्ट का सफल ऑपरेशन |


श्रीमती  राजवती 45 वर्षीया प्रतिष्ठित एवं विश्वशनीय के. एम.सी. डिजिटल अस्पताल मे भर्ती थी ,एक काफी बड़ी 'ओवेरियन सिष्ट' संभवित विकृत रोग के इलाज के लिए उन पर 26 फरवरी 2020 को खास विशेषज्ञों की टीम द्वारा सर्जरी की गयी|


इसके लिए विशेष रूप से लखनऊ के प्रतिष्ठित डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव,एम.एस.(जनरल सर्जरी),एम. सीएच(कैंसर सर्जरी) को बुलाया गया था |
जिन्होने  डॉ.रश्मि श्रीवास्तव एवं डॉ.शांति विजय मिश्र  की ज्वाइंट टीम के साथ दुरूह सर्जरी की |
यह ओवैरियन सिष्ट  काफी बड़ी थी|
8 किलोग्राम से ज्यादा वजन की थी|

यह संभवतः महाराजगंज के इतिहास मे पहली इस प्रकार की सर्जरी थी|
मरीज और उनके परिवार जन बहुत धन्यवाद एवं संतुष्टि से भरे हैं| 
 बीमारियो के निदान एवं इलाज के लिए संपर्क करे, के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल महराजगंज

Wednesday, February 26, 2020

Seizure दौरे पड़ना


Image result for seizure

Seizure दौरे दिमाग की प्रवृतियों मे अचानक होने वाले अनियंत्रित परिवर्तन है| यह इस बात के प्रतीक है कि दिमाग में कोई समस्या मौजूद हैं |अधिकांश दौरे में होशो हवास नहीं रहता और शरीर कांपने लगते हैं| कभी-कभी उसकी वजह से व्यक्ति इस तरह एकटक देखता रहता है |जैसे सम्मोहन में हो, अधिकतर दौरे कुछ मिनट  से कम समय तक ही रहते हैं| और दौरे के बाद व्यक्ति चकराया हुआ हो सकता है| जिस व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ते हो उसे एपिलेप्सी नामक रोग हो सकता है

दौरे पड़ने के कारण:-
  • एपिलेप्सी |
  • दिमाग मे चोट  |
  • संक्रमन |
  • अल्कोहल या नशीली दवाओ का इस्तेमाल |
  • सोडियम अथवा रक्त शर्करा का कम स्तर |
  • एल्जाइमर का रोग |
  • जन्म के दौरान रक्त की कमी या जन्म मे किसी चिकित्सीय बीमारी की मौजूदगी |
दौरो के लक्षण
कई बार दौरा पड़ने से पहले कुछ लोगों को चेतावनी स्वरूप लक्षण महसूस होते हैं |जिसे औरा कहा जाता है यह एक सिरदर्द दृष्टि में परिवर्तन या आवाजों का सुनाई देना या धुए की तरह की कोई गंध आना हो सकता है |
दौरा पड़ने के दौरान यह हो सकता है:-
  • शरीर जकड़ जाना, झटके आना या चेहरे की मांसपेशियों में खीच जाने  जैसी नियंत्रण ना की जा सकने वाली शारीरिक गतिविधियां|
  • सांस लेने मे तखलीफ़ |
  • मलाशय या मूत्राशय पर नियंत्रण खो देना |


   उपचार-
   उपचार दौरो के कारण पर आधारित होता है :-
  • यदि व्यक्ति को दौरा पहली बार पड़ा है तो चिकित्सक लक्षणों के बारे में पूछेगा और यह देखने के लिए जांच करेगा कि किसी चिकित्सा बीमारी की वजह से तो यह नहीं हुआ है रक्त जांच और कंप्यूटराइज टोमोग्राफी (सीटी स्कैन) मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) ईईजी या लंबर पक्चर जैसे अन्य जांचे  की जा सकती है|
  • तेज बुखार या  किसी  दवा की वजह से पड़ने वाले दौरे का उपचार उस वजह को खत्म करके किया जाता है|
  • एपिलेप्सी से पीड़ित व्यक्ति में दौरा पड़ना इस बात का संकेत होता है कि उस स्त्री या पुरुष की दवा में बदलाव की जरूरत है|
अधिकांस दौरे दवाओ से संभाले जा सकते है, अगर दवाओ से व्यक्ति के दौरो में कमी नहीं आती है तो शल्य चिकित्सा इसका विकल्प हो सकता है

अगर किसी महिला या पुरुष एवं बच्चे को दौरे की विमारी हो तो बिना देर किये संपर्क करे, के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल महराजगंज,



Tuesday, February 25, 2020

Health is Wealth (स्वाथ्य ही धन है)

“Health is Wealth” इस लाइन को जानते तो सभी हैं, पर इसके लिए टाइम कितने लोग देते हैं, यह सोचने वाली बात हैं . ज़िन्दगी में खुश रहने के लिए जरुरी है शारीरिक एवम मानसिक सभी तरह से हेल्थी बने रहें . आमतौर पर लोगो का सोचना होता हैं कि, वह अपने डेली रूटीन में काफी भाग दौड़ लेते हैं, इसलिए उन्हें किसी भी शारीरिक एक्सरसाइज की जरुरत नहीं हैं . लेकिन ऐसा सोचना ही गलत है. आप जो भी काम कर रहे हैं, वो आपकी ज़िन्दगी का हिस्सा बन चूका हैं. आपके शरीर को इस तरह के लाइफस्टाइल की आदत हो चुकी हैं, इसलिए कुछ वक्त किसी भी तरह की  एक्सरसाइज सभी के लिए जरुरी हैं,
                       बहुत से लोगो का यह भी मानना होता है कि एक्सरसाइज केवल मोटे लोगो के लिए जरुरी है, यह भी गलत हैं, एक्सरसाइज सभी के लिए जरुरी हैं, कई बार आपने देखा होगा बिलकुल दुबला पतला व्यक्ति भी कई तरह के शारीरिक काम नहीं कर पाता. हाई व लो ब्लडप्रेशर  की परेशानी दुबले व्यक्ति को भी हो सकती हैं, और कई बार मोटा दिखने वाला व्यक्ति भी फुर्तीला होता है, स्टेमिना बढ़ाना बहुत जरुरी है, अगर आप अच्छा जीवन चाहते है,

शारीरिक श्रम न करने के नुकसान :-

1.वजन बढ़ता है
2.शरीर में आलस्य बढ़ता है
3.बीमारियाँ होती है
4.कुछ अन्य शारीरिक काम करने से जल्दी थकावट होती है

सेहत से सम्बंधित महत्वपूर्ण बातें    Health is wealth important tips

Health Tips 1. डेली रूटीन में किसी भी तरह की एक्सरसाइज को समय (30min से 45 min) दे. 
Health Tips 2. पानी की एक उचित मात्रा होना भी बहुत जरुरी हैं. दिन भर में 12 से 15 गिलास पानी लेना ही चाहिए, इससे हानिकारक टाक्सिन शरीर से बाहर होते है और कई तरह की बिमारियों से शरीर को दूर रखते हैं. 
Health Tips 3. सुबह में जब भी आप सोकर उठे तब 1 गिलास  पानी ले, और फ्रेश होने के बाद 1 गिलास गुनगुना पानी गुनगुना पानी ले . जिसमे 6 से 7 बूँद नीम्बू के रस की डाले और अगर हो सके  तो 1 चम्मच शहद भी मिला सकते हैं.
Health Tips 4. लंच और डिनर के 10 min पहले 1 गिलास पानी लेना चाहिए. इससे पाचन ठीक होता है, और अगर यह गुनगुना पानी हो तो और भी अच्छा होगा.
Health Tips 5. लंच और डिनर के 30min बाद पानी पियें. खाना लेने के तुरंत बाद केवल थोड़ा सा ही पानी ले . अगर यह water luke warm गुनगुना हो तो बहुत लाभकारी होगा.
Health Tips 6. पानी की नियमित मात्रा लेने से आपके चेहरे पर भी ग्लो (चमक) आती हैं, अगर आप कुछ दिन तक गिलास गिन करके 12 to 15 गिलास पानी ले तो कुछ दिन  के बाद यह आपके रूटीन में सेट हो जायेगा.
Health Tips 7. लंच एवम डिनर के बाद अगर आप 10 min स्लो वाक करें, तो काफी अच्छा साबित होगा.
Health Tips 8. अगर आप दिन भर में कम से कम 2 बार काली चाय नीम्बू व् शहद के साथ या ग्रीन टी लेते हैं, तो आपके शरीर में मेटाबोलिस्म  बढ जायेगा, जो कि बहुत जरुरी हैं. मेटाबोलिस्म एक वजह है, जिस कारण वजन बढ़ता हैं. इसकी मात्रा शरीर में अच्छी होना जरुरी हैं और 20 साल  की उम्र  के बाद मेटाबोलिस्म कम होने लगता हैं. इसे बनाये रखने के लिए एक्सरसाइज और एक ठीक रूटीन का होना बहुत जरुरी हैं .
Health Tips 9. मेटाबोलिस्म कम होने से खाना ठीक से पचता नहीं है और शरीर फूलने लगता है फैट बढ़ने लगता हैं . कई बार हम सोचते है, हमारी डाइट बहुत कम है, फिर भी वजन बढ़ता हैं और सामने वाला बहुत खाता हैं फिर भी दुबला पतला हैं . यह मेटाबलिस्म के कारण होता हैं .
Health Tips 10. कम भोजन करने से वजन कम करना गलत हैं, डाइटिंग से लाभ नहीं हानि होती है. सभी को अपनी भूख के हिसाब से ही खाना लेना चाहिए, बस उसे एक साथ ना लेकर कुछ टुकडो में तोड़ देना सही होता है, भोजन में सलाद और दही  बहुत जरुरी हैं, इसे अपनी डाइट में शामिल करें .
Health Tips 11. ब्रेकफास्ट यानि सुबह का नाश्ता करना बहुत जरुरी है और यह हैवी हो तो, आपको दिन भर एनर्जी  महसूस होती हैं, और डिनर जितना हल्का हो उतना अच्छा और जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी करे . देर रात कुछ भी खाना गलत होता है,
Health Tips 12. काम की व्यस्तता के कारण कई लोग देर रात  ही डिनर करते हैं. अगर आप इस आदत को बदल सके तो बहुत अच्छा हैं लेकिन नहीं तो कोशिश करे कि डिनर करने के बाद 10 min वाक  करे और भोजन के 30 min बाद luke warm water (गुनगुना पानी) ले.
आपकी हेल्थ केवल आपके हाथों में हैं, इसका ध्यान कोई और नहीं रख सकता अगर आज अपनी आदते नहीं बदलेंगे तो, भविष्य में पछताने के अलावा कोई बात नहीं बचेगी, आज के वक्त में औसत आयु 60 वर्ष की हो चुकी हैं, पर 10 % लोग ही इस आयु में स्वस्थ है,
सेहत से सम्बंधित जानकारी एवं व्यायाम ( फिजियोथेरेपी ) के लिए संपर्क करे, दिव्यकिरण फिजियोथेरेपी एंड रिहैब डिपार्टमेंट के. एम. सी. डिजिटल हास्पिटल महराजगंज, 

Thursday, February 20, 2020

दिल का दौरा (Heart Attack)




दिल का दौरा (हृदयाघात) तब पड़ता है जब हृदय तक जाने वाले ऑक्सीजन युक्त खून का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। यह वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों के कारण होता है जो हृदय तक खून पहुँचाने वाली धमनियों (कोरोनरी धमनियों) में प्लेक (Plaque; एक चिपचिपा जमाव) बनाकर उन्हें अवरुद्ध करते हैं। बाधित रक्त प्रवाह के कारण हृदय को ऑक्सीजन नहीं मिलता है और यदि हृदय को ऑक्सीजन जल्दी ना मिले तो हृदय की मांसपेशियां नष्ट हो जाती हैं।
भारत में 1 साल में दिल के दौरे के लगभग 20  लाख मामले होते हैं।
निम्नलिखित लोगों को दिल के दौरे का खतरा ज्यादा होता है,
1.      उम्र: 45 से ज़्यादा उम्र के पुरुषों और 55 से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को दिल का दौरा पड़ सकता है।
2.      तंबाकू:- धूम्रपान करने से या जो लोग धूम्रपान करते हैं उनके आसपास रहने से दिल का दौरा आसानी से पड़ सकता है।
3.      उच्च रक्तचाप:- उच्च रक्तचाप से धमनियों को हानि पहुँचता है। जब उच्च रक्तचाप मोटापे, धूम्रपान, उच्च कोलेस्ट्रॉल या शुगर के कारण होता है तो यह जोखिम ओर भी बढ़ जाता है।
4.      कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के उच्च स्तर:- एलडीएल (LDL) कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर से धमनियां संकुचित हो जाती हैं। ट्राइग्लिसराइड के उच्च स्तर से दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है।
5.      मधुमेह:-  जब शरीर पर्याप्त इन्सुलिन (Insulin) का उत्पादन नहीं करता है तो शरीर में शुगर के स्तर बढ़ जाते हैं। अनियंत्रित मधुमेह से दिल के दौरे का जोखिम बढ़ जाता है।
6.      दिल के दौरे की पारिवारिक समस्या:- यदि आपके परिवार के लोगों (पुरुषों को 55 से पहले या महिलाओं को 65 से पहले) को दिल का दौरा पड़ा हो तो आपको दिल का दौरा आसानी से पड़ सकता है।
7.      शारीरिक व्यायाम की कमी:-  शारीरिक व्यायाम की कमी से कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है और मोटापा भी होता है जिससे दिल के दौरे का जोखिम बढ़ता है।
8.      मोटापा:- अपने शरीर का 10 प्रतिशत वज़न घटाने से ही आप दिल का दौरा पड़ने के जोखिम को कम कर सकते हैं।
9.      तनाव:- तनाव से दिल का दौरा पड़ने के जोखिम बढ़ सकते हैं।
10.  नशीले पदार्थों का उपयोग:- ऐसे नशीले पदार्थ जो आपके तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं या कोकेन से आपकी कोरोनेरी धमनियों में ऐंठन हो सकती है जिससे दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है।
11.  ऐसे बीमारी जिसमे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं को नुक्सान पहुँचाती है जैसे रूमटॉइड आर्थराइटिस या लुपस से दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है।


दिल का दौरा के प्रकार - Types of Heart Attack
दिल के दौरे 3 प्रकार के होते हैं
1.      एसटी सेगमेंट एलिवेशन माइओकार्डियल इन्फार्कशन (स्टेमी) (ST Segment Elevation Myocardial Infarction (STEMI:-  स्टेमी (STEMI) से छाती के बीच में दर्द होता है। इसमें तीव्र दर्द नहीं होता है बल्कि दबाव और जकड़न महसूस होती है। कुछ लोगों को बाहों, गले, जबड़े और पीठ में भी दबाव और जकड़न महसूस होती है।
2.      नोन-एसटी सेगमेंट एलिवेशन माइओकार्डियल इन्फार्कशन (एनस्टेमी) (Non-ST Segment Elevation Myocardial Infarction (NSTEMI) :-  एनस्टेमी (NSTEMI) में कोरोनेरी धमनियां आंशिक रूप से अवरुद्ध होती हैं। एनस्टेमी (NSTEMI) से एलेक्ट्रोकार्डिओग्राम (Electrocardiogram) में एसटी (ST) सेगमेंट में कोई बदलाव नहीं आता है।
3.      अस्थिर एनजाइना या कोरोनेरी ऐंठन:- इसके लक्षण स्टेमी (STEMI) के समान होते हैं लेकिन इसे ज्यादातर अपच या मांसपेशियों में दर्द समझ कर नज़रअंदाज़ किया जाता है। जब हृदय की धमनियां संकुचित हो जाती हैं तो हृदय तक जाने वाले रक्त का प्रवाह रुक जाता है या कम हो जाता है। अस्थिर एनजाइना का निदान केवल इमेजिंग (Imaging) या रक्त की जाँच से पता चलता है। कोरोनेरी ऐंठन से कोई खतरनाक हानि नहीं होता है लेकिन इससे दिल का दौरा फिर से पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है।
हार्ट अटैक के लक्षण  heart attack symptoms
दिल का दौरा पड़ने के लक्षण इस प्रकार हैं:-
1.      छाती या बाहों पर दबाव, जकड़न या दर्द महसूस होना जो आपके गले, जबड़े और पीठ तक फैल सकता है।
2.      मतली ,अपच, सीने में जलन पेट में दर्द होना।
3.      सांस लेने में कठिनाई  होना।
4.      कोल्ड स्वेट आना (भय, चिंता, या बीमारी के कारण पसीना आना)।
5.      थकान, चक्कर आना
दिल के दौरे के लक्षण सभी लोगों के लिए सामान्य नहीं होते हैं। सीने में दर्द हमेशा तीव्र होता है लेकिन कुछ लोगों को बहुत कम दर्द भी महसूस हो सकता है जैसा अपच में महसूस होता है। कुछ लोगों (खासकर महिलाओं, बुज़ुर्गों और मधुमेह से पीड़ित) को दर्द ही नहीं होता है।
हार्ट अटैक के कारण – Causes of Heart Attack
जब आपकी एक या एक से अधिक कोरोनरी धमनी अवरुद्ध हो जाए तो दिल का दौरा पड़ता है। कोलेस्ट्रॉल और कई अन्य पदार्थों के संचय के कारण कोरोनरी धमनी संकुचित हो सकती है। इस अवस्था को कोरोनरी धमनी रोग  (Coronary Artery Disease) कहते हैं और अधिकांश दिल के दौरे इसी कारण होते हैं।
दिल के दौरे के दौरान, प्लेक (Plaque; एक चिपचिपा जमाव) फट सकता है और, कोलेस्ट्रॉल और कई अन्य पदार्थ रक्तधारा में फैल सकते हैं। जहाँ प्लेक (Plaque; एक चिपचिपा जमाव) फटता है वहाँ खून का थक्का बन जाता है। अगर यह थक्का बड़ा हो तो इसके कारण रक्त प्रवाह पूरी तरह अवरुद्ध हो सकता है।
दिल का दौरा पड़ने का एक ओर कारण है कोरोनेरी धमनी की ऐंठन जिसके कारण हृदय की मांसपेशियों तक जाने वाला रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। तंबाकू और गैरकानूनी नशीले पदार्थों जैसे कोकेन से जानलेवा ऐंठन पैदा हो सकती है। दिल की धमनी के फटने (स्पोंटेनियस कोरोनेरी आर्टरी डाइसेक्शन) Spontaneous Coronary Artery Dissection  के कारण भी दिल का दौरा पड़ सकता है।
दिल का दौरा से बचाव - Prevention of Heart Attack
दिल के दौरे का खतरा कम करने के लिए:-
1.      दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम करने के लिए और अपने क्षतिग्रस्त दिल के कार्य को बेहतर करने के लिए डॉक्टर द्वारा सलाहित दवाइयों का उपयोग करें और अपने चिकित्सक से सलाह लेते रहें।
2.      स्वस्थ आहार के साथ-साथ स्वस्थ वज़न बनाए रखें, धूम्रपान ना करें, रोज़ व्यायाम करें, ज़्यादा तनाव ना लें और हाई बीपी, रक्त में कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर और मधुमेह जैसी समस्याओं का नियंत्रण करें।
3.      यदि आपको मधुमेह हो तो उसके लिए सलाहित दवाइयों का उपयोग करें और अपने रक्त के शुगर के स्तर की जाँच कराते रहें। यदि आपको कोई हृदय रोग हो तो अपने डॉक्टर से परामर्श करें और डॉक्टर द्वारा सलाहित दवाओं का उपयोग करें।
दिल का दौरा पड़ने पर जाँच एवं परीक्षण - Diagnosis of Heart Attack
K. M. C. Digital hospital (के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल) महराजगंज में दिल (हृदय) से संबधित सभी जाँच उपलब्द है जैसे:-
1. एलेक्ट्रोकार्डिओग्राम (ईसीजी) (Electrocardiogram (ECG):- दिल का दौरे का निदान करने के लिए सबसे पहले ईसीजी (ECG) किया जाता है। यह टेस्ट दिल की विद्युतीय (एलेक्ट्रिकल) गतिविधियों की जाँच करता है। क्षतिग्रस्त दिल की विद्युतीय (एलेक्ट्रिकल) गतिविधियां सामान्य नहीं होती हैं इसलिए ईसीजी (ECG) से पता चल जाता है कि दिल का दौरा पहले कभी पड़ा है या भविष्य में पड़ने वाला है।
2. इकोकार्डियोग्राम Echocardiography:-  चिकित्सकीय समुदाय में अक्सर हृदयीय अनुनाद कार्दियाक इको (ECHO) या इको के रूप में जाना जाता है, जो हृदय का सोनोग्राम है, आमतौर पर चिकित्सा शास्त्र में जिसे इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम कहकर सन्दर्भित किया जाता है.
3. रक्त की जाँच:-  जब दिल का दौरा पड़ता है तो कई एंजाइम रक्त में फैल जाते हैं। यह जानने के लिए की यह एंजाइम रक्त में है या नहीं, आपका डॉक्टर आपके रक्त की जाँच करवा सकता है।
हार्ट अटैक का इलाज - Heart Attack Treatment
दिल के दौरे का उपचार आपको हुए दिल के दौरे के प्रकार पर निर्भर करेगा।
एसटी सेगमेंट एलिवेशन माइओकार्डियल इन्फार्कशन (स्टेमी) (ST Segment Elevation Myocardial Infarction (STEMI)  दिल के दौरे का सबसे गंभीर प्रकार होता है और इसमें आपातकालीन उपचार की आवश्यकता होती है ताकि दिल के दौरे के कारण होने वाले हानि को कम किया जा सके।

       दिल के दौरे के उपचार के लिए कुछ शल्य प्रक्रिया इस प्रकार हैं:-
1.      एंजिओप्लास्टी (Angioplasty):-  बैलून का इस्तेमाल करके या अवरद्ध करने वाले पदार्थ को हटाकर अवरुद्ध धमनी को खोला जाता है।
2.      स्टेंट डालना:- एंजिओप्लास्टी (Angioplasty) के बाद धमनी को खुला रखने के लिए एक प्रकार का ट्यूब (स्टेंट) अवरुद्ध भाग में डाला जाता है।
3.      बायपास सर्जरी:- हृदय के अवरुद्ध भाग में रक्त के प्रवाह की आपूर्ति कराने के लिए सर्जरी।
4.      हार्ट वाल्व सर्जरी:- जिस वाल्व में रिसाव हो रहा हो उस वाल्व को बदलने के लिए सर्जरी।
5.      पेसमेकर सर्जरी:- हृदय की असामान्य लय का एक पेसमेकर की मदद से नियंत्रण किया जाता है।
6.      हृदय प्रत्यारोपण:- यह गंभीर स्तिथियों में किया जाता है जब दिल के दौरे के कारण हृदय की ऊतकें पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं।
हृदय से सम्बंधित विमारियो के निदान एवं उपचार के लिए संपर्क करे,
हृदय रोग विभाग के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल महराजगंज.


Tuesday, February 18, 2020

पेट में इन्फेक्शन के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव Stomach Infection Symptoms, Causes, Treatment के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल महराजगंज

पेट में इन्फेक्शन के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव - Stomach Infection Symptoms, Causes, Treatment In Hindi




पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) एक वायरस, बैक्टीरिया या परजीवी (parasites) के कारण होने वाला एक रोग है, जो दस्त, उल्टी, बुखार और आंतों के अस्तर की सूजन का कारण बनता है। पेट में इन्फेक्शन एक आम समस्या है, जो बच्चों और वयस्कों को सर्वाधिक प्रभावित करती है। चूँकि पेट में इन्फेक्शन की गंभीर स्थिति गुर्दे की विफलता, आंत्र पथ में रक्तस्राव, एनीमिया (anemia) तथा मस्तिष्क क्षति का कारण बन सकती है। पेट में इन्फेक्शन की स्थिति में  चिकित्सीय सहायता प्राप्त करना अति आवश्यक है।
पेट का संक्रमण एक बहुत ही सामान्य स्थिति है, जो दस्त और उल्टी का कारण बनती है। आमतौर पर पेट के बैक्टीरिया या वायरस, पेट में इन्फेक्शन का कारण बनते हैं। जिसमें जियार्डिया (giardia) और क्रिप्टोस्पोरिडियम (cryptosporidium) नामक परजीवी प्रमुख हैं। यह संक्रमण सभी उम्र के व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन छोटे बच्चे विशेष रूप से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। पेट में इन्फेक्शन के अधिकतर मामले बच्चों में रोटावायरस (rotavirus) नामक वायरस के कारण उत्पन्न होते हैं, जबकि वयस्कों में पेट में इन्फेक्शन के अधिकतर मामले आमतौर पर नोरोवायरस (norovirus) या बैक्टीरियल फूड पॉइजनिंग के कारण उत्पन्न होते हैं।
गैस्ट्रोएन्टराइटिस एक संक्रमित बीमारी है, क्योंकि यह अन्य व्यक्तियों में बहुत आसानी से फैल सकता है। आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) अधिक गंभीर हो सकता है, लेकिन यह आमतौर पर एक सप्ताह के भीतर ही दूर हो जाता है।
पेट में इन्फेक्शन के प्रकार – Types of Gastroenteritis:-
पेट में इन्फेक्शन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता हैं,
(1.)          बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस या फूड पॉइजनिंग
(2.)          वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस या स्टमक फ्लू।
बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस – Bacterial Gastroenteritis (food poisoning):-
पेट में इन्फेक्शन तब होता है जब बैक्टीरिया (bacteria) आंत में संक्रमण का कारण बनता है, इस स्थिति को बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस के रूप में जाना जाता है। इस प्रकार के पेट के इन्फेक्शन के परिणामस्वरूप पेट और आंतों में सूजन आ जाती है, इसके अतिरिक्त उल्टी, पेट में ऐंठन और दस्त जैसे लक्षण प्रगट हो सकते हैं। बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस बहुत सामान्य है। इस संक्रमण को फूड पॉइजनिंग” (food poisoning) के नाम से भी जाना जाता है।
बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस खराब स्वच्छता, जानवरों के साथ घनिष्ठ संपर्क या बैक्टीरिया के कारण दूषित भोजन या पानी का सेवन आदि कारणों के परिणामस्वरूप उत्पन्न हो सकता है।
वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस – Viral gastroenteritis (stomach flu):-
जब कोई वायरस (viruses), पेट में इन्फेक्शन संक्रमण का कारण बनता है, तो उसे वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस के नाम से जाना जाता है। यह एक अत्यधिक संक्रामक पेट और आंतों का संक्रमण है, जिसे आमतौर पर स्टमक फ्लू (Stomach flu) के रूप में भी जाना जाता है। वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस या स्टमक फ्लू (Stomach flu) के सामान्य लक्षणों में पानी के समान दस्त, पेट में ऐंठन और उल्टी आदि शामिल हैं।
स्टमक फ्लू विभिन्न प्रकार के वायरस के कारण उत्पन्न होता है, जिनमें रोटावायरस (rotavirus) और नोरोवायरस (norovirus) प्रमुख हैं। प्रत्येक गैस्ट्रोएन्टराइटिस वायरस एक विशेष मौसम में सबसे अधिक सक्रिय होता है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या दूषित भोजन तथा पानी का सेवन करने के बाद एक स्वास्थ्य व्यक्ति वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस को प्राप्त कर सकता है। व्यक्ति अक्सर वायरस के संपर्क में आने के लगभग 12-48 घंटे बाद लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं, तथा यह लक्षण अक्सर 3 से 7 दिनों तक रहते हैं। फूड पॉइजनिंग (food poisoning) की अपेक्षा स्टमक फ्लू के लक्षण अधिक समय तक बने रहते हैं।
पेट में इन्फेक्शन के लक्षण – Stomach infection (gastroenteritis)
पेट के संक्रमण (gastroenteritis) से सम्बंधित लक्षण आमतौर पर व्यक्ति के संक्रमित होने के एक दिन बाद प्रगट हो सकते हैं। यह लक्षण आमतौर पर एक सप्ताह या इससे कम समय तक चल सकते हैं, लेकिन कभी-कभी यह लक्षण बहुत लंबे समय बने रह सकते हैं।
आंत्रशोथ (gastroenteritis) के लक्षणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है, जैसे:
·      दस्त लगना
·      पेट में दर्द महसूस होना
·      उल्टी की समस्या उत्पन्न होना
·      अपने आपको बीमार महसूस करना
·      सिरदर्द होना
·      हल्का बुखार
·      भूख में कमी आना
·      पेट में खराबी तथा पेट में ऐंठन महसूस होना
·      मांसपेशियों में दर्द महसूस होना
·      ठंड लगना, इत्यादि।
आंत्रशोथ की स्थिति में उत्पन्न होने वाली सबसे आम समस्या निर्जलीकरण है। पेट के संक्रमण (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) की स्थिति में निर्जलीकरण की समस्या तब उत्पन्न होती है जब उल्टी और दस्त के चलते, पर्याप्त तरल पदार्थ का सेवन न किया जाए। निर्जलीकरण की समस्या शिशुओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों को सबसे अधिक परेशान करती है।
पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) के जोखिम कारक – Gastroenteritis risk factor:-
पेट में इन्फेक्शन सभी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। जिन लोगों को पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) होने की अधिक संभावना हो सकती है, उनमें शामिल हैं:
·      कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति जैसी- छोटे बच्चे, वृद्ध व्यक्तियों।
·      स्कूल के बच्चे या छात्रावास के निवासी।
·      एचआईवी/एड्स, कीमोथेरेपी या किसी अन्य चिकित्सकीय स्थितियों से सम्बंधित व्यक्ति।
पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) की जटिलताएं – Complications of gastroenteritis
पेट में इन्फेक्शन बहुत कम स्थितियों में जटिलताओं का कारण बनता है। पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) की मुख्य जटिलता निर्जलीकरण है, जो शरीर में आवश्यक लवण और खनिजों की गंभीर रूप से कमी का कारण बनती है। इसके अतिरिक्त निम्न जटिलताओं का भी सामना करना पड़ सकता है, जैसे:
·      खूनी दस्त (bloody diarrhoea)
·      उच्च बुखार
·      मांसपेशियों में दर्द
·      आंत्र आंदोलनों को नियंत्रित करने में असमर्थता
·      गुर्दे की विफलता
·      आंत्र पथ में रक्तस्राव
·      एनीमिया (anemia)
उपचार न किये जाने पर गंभीर संक्रमण की स्थिति मस्तिष्क क्षति और मृत्यु का कारण भी बन सकती है।
गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लिए डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए – when to see a doctor for gastroenteritis
यदि पेट में इन्फेक्शन (gastroenteritis) के लक्षणों में पांच दिन (बच्चों के लिए दो दिन) के बाद भी सुधार नहीं आता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति को निम्न स्थितियों में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए:
·      छोटे बच्चे को दस्त या उल्टी होने पर,
·      बुखार होने पर,
·      पेट में इन्फेक्शन से सम्बंधित लक्षणों में कुछ दिनों के बाद सुधार नहीं होने पर,
·      गंभीर निर्जलीकरण के लक्षण प्रगट होने पर, जैसे लगातार चक्कर आना, मूत्र त्याग करने में कठिनाई, इत्यादि।
पेट से संबधित बीमारियो के निदान एवं इलाज के लिए संपर्क करे, के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल महराजगंज