Friday, February 7, 2020

फेफड़ों में इन्फेक्शन (संक्रमण) का कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव

फेफड़ों में इन्फेक्शन (संक्रमण) का कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव Lungs infection Symptoms, Causes, Treatment and Prevention
वर्तमान में फेफड़ों के संक्रमण से सम्बंधित अधिक मामले देखने को मिलते हैं, और यह रोग मृत्यु का कारण भी बनते हैं। फेफड़े के संक्रमण की स्थिति में सूजन, संक्रीण वायुमार्ग, क्षतिग्रस्त वायुकोष इत्यादि समस्याएं उत्पन्न होती हैं। फेफड़ों के संक्रमण की बीमारी एक वायरस, कवक या बैक्टीरिया के कारण उत्पन्न होती है। सबसे आम फेफड़ों में संक्रमण के रूप में इन्फ्लूएंजा (फ्लू), तपेदिक (टीबी), ब्रोंकाइटिस और निमोनिया शामिल हैं। फेफड़ों में इन्फेक्शन की स्थिति में व्यक्ति अनेक प्रकार के लक्षणों को महसूस करता है। यह लक्षण सर्दी या फ्लू के समान अधिक सामान्य होने के साथ-साथ अधिक गंभीर तक हो सकते हैं और लंबे समय तक रहते हैं। अतः व्यक्ति को समय पर इसके लक्षणों की पहचान कर इलाज प्राप्त करना आवश्यक होता है। आज के इस लेख में आप फेफड़ों में इन्फेक्शन का कारण, लक्षण, जांच, इलाज, बचाव और उपचार के बारे में जानेगें।
फेफड़ों में इन्फेक्शन:-
वायरस, बैक्टीरिया और कभी-कभी एक कवक (fungus) के कारण फेफड़ों के प्रभावित होने की स्थिति फेफड़ों का संक्रमण कहलाती है। जब यह सूक्ष्मजीव किसी व्यक्ति के फेफड़ों में इकट्ठा होते हैं, तो फेफड़ों में वायुकोष (air sacs) मवाद और तरल से भर जाती है, जिससे व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। संक्रमित व्यक्ति द्वारा छींकने या खांसने के दौरान बैक्टीरिया या वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित हो सकते हैं, और फेफड़ों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। फेफड़ों के संक्रमण का सबसे सामान्य प्रकार निमोनिया है।
फेफड़ों में इन्फेक्शन से सम्बंधित रोग के नाम निम्न हैं:-
Ø ब्रोंकाइटिस (Bronchitis)
Ø निमोनिया (pneumonia)
Ø इन्फ्लूएंजा (फ्लू) (Influenza)
Ø तपेदिक (टीबी) (Tuberculosis)
Ø श्वसन संकट सिंड्रोम (Respiratory distress syndrome)
Ø ब्रोंकियोलाइटिस (bronchiolitis)
Ø ब्रोन्किइक्टेसिस (Bronchiectasis) – एक ऐसी स्थिति जिसमें फेफड़ों के वायुमार्ग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
फेफड़ों के संक्रमण रोग:-
फेफड़ों के संक्रमण की बीमारी में मुख्य रूप से निम्न को शामिल किया जा सकता है, जैसे
इन्फ्लुएंजा – Influenza:-
फ्लू (इन्फ्लुएंजा) नामक फेफड़ों का संक्रमण रोग, इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है। यह एक सामान्य मौसमी श्वसन संक्रमण (seasonal respiratory infection) है जो नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करता है। बुजुर्गों, नवजात शिशुओं और पुरानी चिकित्सा स्थितियों वाले लोगों को विशेष रूप से फ्लू होने का खतरा अधिक होता है। इन्फ्लुएंजा नामक फेफड़ों का संक्रमण, गंभीर और जीवन के लिए घातक हो सकता है।

इन्फ्लुएंजा के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
·      बुखार आना
·      ठंड लगना
·      शरीर में दर्द
·      खांसी
·      नाक बहना
·      सिर दर्द
·      गले में खरास
तपेदिक Tuberculosis :-
तपेदिक को आमतौर पर क्षय रोग या टीबी के रूप में जाना जाता है, एक अत्यधिक संक्रामक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। अगर टीबी या तपेदिक का सही तरीके से इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा हो सकती है। यह फेफड़ों का संक्रमण रोग  शरीर के अन्य अंगों जैसे किडनी, रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकता है। तपेदिक की स्थिति निम्न लक्षणों के उत्पन्न होने का कारण बन सकती है, जैसे:

गंभीर खांसी की समस्या, जो तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहती है
खांसी के दौरान खून या बलगम आना
सीने में दर्द
टीबी से सम्बंधित अन्य लक्षणों में शामिल हैं:
·       थकान महसूस होना
·       भूख में कमी आना
·       अस्पष्ट रूप से वजन में कमी
·       बुखार आना
·       ठंड लगना
·       रात को पसीना, इत्यादि
निमोनिया – pneumonia:-
निमोनिया, जो फेफड़ों के छोटे वायुकोष (air sacs) (एल्वियोली (alveoli)) को प्रभावित करता है, यह फेफड़ों का संक्रमण अक्सर बैक्टीरिया के कारण होता है, लेकिन एक वायरस के कारण भी हो सकता है। निमोनिया का आमतौर पर इलाज संभव है, लेकिन यह संक्रमण बुजुर्गों में घातक हो सकता है। निमोनिया के लक्षणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है:
·      थकान महसूस होना
·      भूख में कमी आना
·      अस्पष्ट रूप से वजन में कमी
·      बुखार आना
·      ठंड लगना
·      रात को पसीना, इत्यादि
ब्रोंकाइटिस – Bronchitis:-
जब बड़ी ब्रोन्कियल नलिकाएं (bronchial tubes), जो फेफड़ों से हवा को बाहर ले जाती हैं, संक्रमित हो जाती हैं और उनके अस्तर में सूजन आ जाती है, तो इस स्थिति को ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) कहा जाता है। बैक्टीरिया की अपेक्षा वायरस के कारण ब्रोंकाइटिस नामक फेफड़ों का संक्रमण होने की अधिक संभावना होती है। ब्रोंकाइटिस दो प्रकार का होता है-

एक्यूट ब्रोंकाइटिस (Acute Bronchitis),
क्रोनिक ब्रोंकाइटिस (Chronic Bronchitis)
वायरस, फेफड़ों या फेफड़ों तक जाने वाले वायु मार्ग पर भी हमला कर सकते हैं, और व्यक्ति को बीमार बना सकते हैं। इस रोग को ब्रोंकियोलाइटिस (bronchiolitis) कहा जाता है। वायरल ब्रोंकियोलाइटिस (Viral bronchiolitis) सबसे अधिक बच्चों और शिशुओं को प्रभावित करता है।
फेफड़ों के संक्रमण के लक्षण:-
फेफड़ों के संक्रमण से सम्बंधित लक्षण हल्के से अधिक गंभीर तक हो सकते हैं, जो कि संक्रमण रोग के प्रकार पर निर्भर करते हैं। लक्षणों की गंभीरता पीड़ित व्यक्ति की उम्र और समग्र स्वास्थ्य सहित अनेक कारकों पर निर्भर करती है। फेफड़ों में इन्फेक्शन से सम्बंधित लक्षण सर्दी या फ्लू की बीमारी के समान हो सकते हैं, लेकिन यह लंबे समय बने रहते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को फेफड़ों का संक्रमण है, तो वह निम्न लक्षणों को प्राप्त कर सकता है, जिनमें शामिल हैं:
·      बलगम युक्त खांसी आना
·      बलगम के साथ खून आना
·      छाती (सीने) में दर्द होना
·      दर्द, जिसे ऊपरी पीठ तक महसूस किया जा सकता है।
·      शरीर और मांसपेशियों में दर्द
·      मांसपेशियों में सूजन
·      नाक बहना (Runny nose)
·      सांस लेने में तकलीफ होना
·      थकान महसूस होना
·      घरघराहट होना
·      त्वचा या होंठ का नीला पड़ जाना (ऑक्सीजन की कमी के कारण)
·      बुखार आना, बैक्टीरियल लंग इन्फेक्शन (bacterial lung infection) की स्थिति में बुखार 105 °F (40.5 °C) तक बढ़ सकता है।
·      बुखार के साथ-साथ निम्न लक्षणों को भी महसूस किया जा सकता है, जैसे- पसीना आना, ठंड लगना, मांसपेशियों के दर्द, निर्जलीकरण, सिरदर्द, कमजोरी महसूस होना, इत्यादि।

फेफड़ों में संक्रमण का कारण:-
फेफड़ों के इन्फेक्शन का मुख्य कारण आमतौर पर वायरस, बैक्टीरिया या फंगल हो सकते हैं। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) की स्थिति से पीड़ित व्यक्ति भी फेफड़ों में संक्रमण की स्थिति को प्राप्त कर सकते हैं।

ब्रोंकाइटिस नामक फेफड़ों के संक्रमण का कारण बनने वाले सूक्ष्मजीवों में निम्न शामिल हो सकते हैं, जैसे:
·      वायरस जैसे- इन्फ्लूएंजा वायरस या रेस्पिरेटरी सिंक्राइटियल वायरस (respiratory syncytial virus (RSV))
·      बैक्टीरिया जैसे- माइकोप्लाज्मा निमोनिया (Mycoplasma pneumoniae), क्लैमाइडिया निमोनिया (Chlamydia pneumoniae) और बोर्डेटेला पर्टुसिस (Bordetella pertussis)

निमोनिया के लिए जिम्मेदार सबसे आम सूक्ष्मजीवों में शामिल हैं:-
·      बैक्टीरिया जैसे- स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया (सबसे आम), हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा और माइकोप्लाज्म न्यूमोनिया
·      वायरस जैसे- इन्फ्लूएंजा वायरस
फेफड़े में संक्रमण की स्थिति शायद ही कभी कवक (fungi) जैसे कि न्यूमोसिस्टिस जिरोवेसी (Pneumocystis jirovecii), एस्परगिलस (Aspergillus) या हिस्टोप्लाज्मा कैप्सुलटम (Histoplasma capsulatum) के कारण उत्पन्न हो सकती है।

एक फंगल लंग इन्फेक्शन (fungal lung infection) उन लोगों में अधिक होता है जो कुछ प्रकार के कैंसर या एचआईवी से या इम्यूनोसप्रेस्सिव (immunosuppressive) दवाएँ लेने से प्रतिरक्षादमन (immunosuppressed) होते हैं।
फेफड़ों में इन्फेक्शन के जोखिम कारक:-
बच्चों और वृद्ध वयस्कों को फेफड़ों में संक्रमण होने का ख़तरा अधिक होता है। इसके अधिक निम्न स्थितियां भी फेफड़ों में संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:
·      धूम्रपान करना
·      ख़राब स्वच्छता
·      कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली होना
·      क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीस chronic obstructive pulmonary disease (COPD) से ग्रस्त होना।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे:- के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल महराजगंज,

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