Thursday, February 20, 2020

दिल का दौरा (Heart Attack)




दिल का दौरा (हृदयाघात) तब पड़ता है जब हृदय तक जाने वाले ऑक्सीजन युक्त खून का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। यह वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों के कारण होता है जो हृदय तक खून पहुँचाने वाली धमनियों (कोरोनरी धमनियों) में प्लेक (Plaque; एक चिपचिपा जमाव) बनाकर उन्हें अवरुद्ध करते हैं। बाधित रक्त प्रवाह के कारण हृदय को ऑक्सीजन नहीं मिलता है और यदि हृदय को ऑक्सीजन जल्दी ना मिले तो हृदय की मांसपेशियां नष्ट हो जाती हैं।
भारत में 1 साल में दिल के दौरे के लगभग 20  लाख मामले होते हैं।
निम्नलिखित लोगों को दिल के दौरे का खतरा ज्यादा होता है,
1.      उम्र: 45 से ज़्यादा उम्र के पुरुषों और 55 से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को दिल का दौरा पड़ सकता है।
2.      तंबाकू:- धूम्रपान करने से या जो लोग धूम्रपान करते हैं उनके आसपास रहने से दिल का दौरा आसानी से पड़ सकता है।
3.      उच्च रक्तचाप:- उच्च रक्तचाप से धमनियों को हानि पहुँचता है। जब उच्च रक्तचाप मोटापे, धूम्रपान, उच्च कोलेस्ट्रॉल या शुगर के कारण होता है तो यह जोखिम ओर भी बढ़ जाता है।
4.      कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के उच्च स्तर:- एलडीएल (LDL) कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर से धमनियां संकुचित हो जाती हैं। ट्राइग्लिसराइड के उच्च स्तर से दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है।
5.      मधुमेह:-  जब शरीर पर्याप्त इन्सुलिन (Insulin) का उत्पादन नहीं करता है तो शरीर में शुगर के स्तर बढ़ जाते हैं। अनियंत्रित मधुमेह से दिल के दौरे का जोखिम बढ़ जाता है।
6.      दिल के दौरे की पारिवारिक समस्या:- यदि आपके परिवार के लोगों (पुरुषों को 55 से पहले या महिलाओं को 65 से पहले) को दिल का दौरा पड़ा हो तो आपको दिल का दौरा आसानी से पड़ सकता है।
7.      शारीरिक व्यायाम की कमी:-  शारीरिक व्यायाम की कमी से कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है और मोटापा भी होता है जिससे दिल के दौरे का जोखिम बढ़ता है।
8.      मोटापा:- अपने शरीर का 10 प्रतिशत वज़न घटाने से ही आप दिल का दौरा पड़ने के जोखिम को कम कर सकते हैं।
9.      तनाव:- तनाव से दिल का दौरा पड़ने के जोखिम बढ़ सकते हैं।
10.  नशीले पदार्थों का उपयोग:- ऐसे नशीले पदार्थ जो आपके तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं या कोकेन से आपकी कोरोनेरी धमनियों में ऐंठन हो सकती है जिससे दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है।
11.  ऐसे बीमारी जिसमे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं को नुक्सान पहुँचाती है जैसे रूमटॉइड आर्थराइटिस या लुपस से दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है।


दिल का दौरा के प्रकार - Types of Heart Attack
दिल के दौरे 3 प्रकार के होते हैं
1.      एसटी सेगमेंट एलिवेशन माइओकार्डियल इन्फार्कशन (स्टेमी) (ST Segment Elevation Myocardial Infarction (STEMI:-  स्टेमी (STEMI) से छाती के बीच में दर्द होता है। इसमें तीव्र दर्द नहीं होता है बल्कि दबाव और जकड़न महसूस होती है। कुछ लोगों को बाहों, गले, जबड़े और पीठ में भी दबाव और जकड़न महसूस होती है।
2.      नोन-एसटी सेगमेंट एलिवेशन माइओकार्डियल इन्फार्कशन (एनस्टेमी) (Non-ST Segment Elevation Myocardial Infarction (NSTEMI) :-  एनस्टेमी (NSTEMI) में कोरोनेरी धमनियां आंशिक रूप से अवरुद्ध होती हैं। एनस्टेमी (NSTEMI) से एलेक्ट्रोकार्डिओग्राम (Electrocardiogram) में एसटी (ST) सेगमेंट में कोई बदलाव नहीं आता है।
3.      अस्थिर एनजाइना या कोरोनेरी ऐंठन:- इसके लक्षण स्टेमी (STEMI) के समान होते हैं लेकिन इसे ज्यादातर अपच या मांसपेशियों में दर्द समझ कर नज़रअंदाज़ किया जाता है। जब हृदय की धमनियां संकुचित हो जाती हैं तो हृदय तक जाने वाले रक्त का प्रवाह रुक जाता है या कम हो जाता है। अस्थिर एनजाइना का निदान केवल इमेजिंग (Imaging) या रक्त की जाँच से पता चलता है। कोरोनेरी ऐंठन से कोई खतरनाक हानि नहीं होता है लेकिन इससे दिल का दौरा फिर से पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है।
हार्ट अटैक के लक्षण  heart attack symptoms
दिल का दौरा पड़ने के लक्षण इस प्रकार हैं:-
1.      छाती या बाहों पर दबाव, जकड़न या दर्द महसूस होना जो आपके गले, जबड़े और पीठ तक फैल सकता है।
2.      मतली ,अपच, सीने में जलन पेट में दर्द होना।
3.      सांस लेने में कठिनाई  होना।
4.      कोल्ड स्वेट आना (भय, चिंता, या बीमारी के कारण पसीना आना)।
5.      थकान, चक्कर आना
दिल के दौरे के लक्षण सभी लोगों के लिए सामान्य नहीं होते हैं। सीने में दर्द हमेशा तीव्र होता है लेकिन कुछ लोगों को बहुत कम दर्द भी महसूस हो सकता है जैसा अपच में महसूस होता है। कुछ लोगों (खासकर महिलाओं, बुज़ुर्गों और मधुमेह से पीड़ित) को दर्द ही नहीं होता है।
हार्ट अटैक के कारण – Causes of Heart Attack
जब आपकी एक या एक से अधिक कोरोनरी धमनी अवरुद्ध हो जाए तो दिल का दौरा पड़ता है। कोलेस्ट्रॉल और कई अन्य पदार्थों के संचय के कारण कोरोनरी धमनी संकुचित हो सकती है। इस अवस्था को कोरोनरी धमनी रोग  (Coronary Artery Disease) कहते हैं और अधिकांश दिल के दौरे इसी कारण होते हैं।
दिल के दौरे के दौरान, प्लेक (Plaque; एक चिपचिपा जमाव) फट सकता है और, कोलेस्ट्रॉल और कई अन्य पदार्थ रक्तधारा में फैल सकते हैं। जहाँ प्लेक (Plaque; एक चिपचिपा जमाव) फटता है वहाँ खून का थक्का बन जाता है। अगर यह थक्का बड़ा हो तो इसके कारण रक्त प्रवाह पूरी तरह अवरुद्ध हो सकता है।
दिल का दौरा पड़ने का एक ओर कारण है कोरोनेरी धमनी की ऐंठन जिसके कारण हृदय की मांसपेशियों तक जाने वाला रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। तंबाकू और गैरकानूनी नशीले पदार्थों जैसे कोकेन से जानलेवा ऐंठन पैदा हो सकती है। दिल की धमनी के फटने (स्पोंटेनियस कोरोनेरी आर्टरी डाइसेक्शन) Spontaneous Coronary Artery Dissection  के कारण भी दिल का दौरा पड़ सकता है।
दिल का दौरा से बचाव - Prevention of Heart Attack
दिल के दौरे का खतरा कम करने के लिए:-
1.      दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम करने के लिए और अपने क्षतिग्रस्त दिल के कार्य को बेहतर करने के लिए डॉक्टर द्वारा सलाहित दवाइयों का उपयोग करें और अपने चिकित्सक से सलाह लेते रहें।
2.      स्वस्थ आहार के साथ-साथ स्वस्थ वज़न बनाए रखें, धूम्रपान ना करें, रोज़ व्यायाम करें, ज़्यादा तनाव ना लें और हाई बीपी, रक्त में कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर और मधुमेह जैसी समस्याओं का नियंत्रण करें।
3.      यदि आपको मधुमेह हो तो उसके लिए सलाहित दवाइयों का उपयोग करें और अपने रक्त के शुगर के स्तर की जाँच कराते रहें। यदि आपको कोई हृदय रोग हो तो अपने डॉक्टर से परामर्श करें और डॉक्टर द्वारा सलाहित दवाओं का उपयोग करें।
दिल का दौरा पड़ने पर जाँच एवं परीक्षण - Diagnosis of Heart Attack
K. M. C. Digital hospital (के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल) महराजगंज में दिल (हृदय) से संबधित सभी जाँच उपलब्द है जैसे:-
1. एलेक्ट्रोकार्डिओग्राम (ईसीजी) (Electrocardiogram (ECG):- दिल का दौरे का निदान करने के लिए सबसे पहले ईसीजी (ECG) किया जाता है। यह टेस्ट दिल की विद्युतीय (एलेक्ट्रिकल) गतिविधियों की जाँच करता है। क्षतिग्रस्त दिल की विद्युतीय (एलेक्ट्रिकल) गतिविधियां सामान्य नहीं होती हैं इसलिए ईसीजी (ECG) से पता चल जाता है कि दिल का दौरा पहले कभी पड़ा है या भविष्य में पड़ने वाला है।
2. इकोकार्डियोग्राम Echocardiography:-  चिकित्सकीय समुदाय में अक्सर हृदयीय अनुनाद कार्दियाक इको (ECHO) या इको के रूप में जाना जाता है, जो हृदय का सोनोग्राम है, आमतौर पर चिकित्सा शास्त्र में जिसे इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम कहकर सन्दर्भित किया जाता है.
3. रक्त की जाँच:-  जब दिल का दौरा पड़ता है तो कई एंजाइम रक्त में फैल जाते हैं। यह जानने के लिए की यह एंजाइम रक्त में है या नहीं, आपका डॉक्टर आपके रक्त की जाँच करवा सकता है।
हार्ट अटैक का इलाज - Heart Attack Treatment
दिल के दौरे का उपचार आपको हुए दिल के दौरे के प्रकार पर निर्भर करेगा।
एसटी सेगमेंट एलिवेशन माइओकार्डियल इन्फार्कशन (स्टेमी) (ST Segment Elevation Myocardial Infarction (STEMI)  दिल के दौरे का सबसे गंभीर प्रकार होता है और इसमें आपातकालीन उपचार की आवश्यकता होती है ताकि दिल के दौरे के कारण होने वाले हानि को कम किया जा सके।

       दिल के दौरे के उपचार के लिए कुछ शल्य प्रक्रिया इस प्रकार हैं:-
1.      एंजिओप्लास्टी (Angioplasty):-  बैलून का इस्तेमाल करके या अवरद्ध करने वाले पदार्थ को हटाकर अवरुद्ध धमनी को खोला जाता है।
2.      स्टेंट डालना:- एंजिओप्लास्टी (Angioplasty) के बाद धमनी को खुला रखने के लिए एक प्रकार का ट्यूब (स्टेंट) अवरुद्ध भाग में डाला जाता है।
3.      बायपास सर्जरी:- हृदय के अवरुद्ध भाग में रक्त के प्रवाह की आपूर्ति कराने के लिए सर्जरी।
4.      हार्ट वाल्व सर्जरी:- जिस वाल्व में रिसाव हो रहा हो उस वाल्व को बदलने के लिए सर्जरी।
5.      पेसमेकर सर्जरी:- हृदय की असामान्य लय का एक पेसमेकर की मदद से नियंत्रण किया जाता है।
6.      हृदय प्रत्यारोपण:- यह गंभीर स्तिथियों में किया जाता है जब दिल के दौरे के कारण हृदय की ऊतकें पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं।
हृदय से सम्बंधित विमारियो के निदान एवं उपचार के लिए संपर्क करे,
हृदय रोग विभाग के.एम.सी. डिजिटल हॉस्पिटल महराजगंज.


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